मेरे ख़्वाब…….. ( My Dreams are there) – Agron Shele / Transcriber Deepti Gupta

Poem by Agron Shele

 

मेरे ख़्वाब……..

My Dreams are there’ in Hindi 


मेरे कुछ ख़्वाब हैं,
जो दूर तक पसरे अन्तहीन समुद्र में
सर्द हिमशिला बन के रह गए हैं
मेरी सोच अक्सर मन के विभिन्न आकाशों में
इस छोर से उस छोर तक
दिशाहीन और अन्तहीन उड़ान भरती है

मेरे कुछ ख़्वाब हैं,
वे मेरे अपने सपने कभी-कभी ख़ूबसूरत
बसन्तकालीन गगन में
नन्हें सितारे बन कर टिमटिमाते हैं
जब कभी सुकोमल भावनाएँ टुकड़े-टुकडे
हो जाती हैं, तो उनके साथ
हमारी रुह भी चूर-चूर हो .फ़ना.हो जाती है

मेरे कुछ ख़्वाब हैं
जो भोर की धूप की तरह उजले और सुनहरे हैं
तो कुछ मन में पतझड की तरह
उदासीन आस बन कर अपने आप सँजो गए हैं
तो कुछ दर्द और उदासी की
बौछारों की तरह मेरी वेदना बन गए हैं..!

मेरे कुछ ख़्वाब हैं,
जो इन्द्रधनुष और उसके सुकोमल रंगों की तरह
नाज़ुक और बहुरंगी है
उजले और खिले दिन की आशा और खुशी
वक्र खाईयों की तरह पीड़ा देती हैं
तब वह पीड़ा कविता में प्रतिरोध का स्वर बन जाती हैं

मेरे कुछ ख़्वाब हैं
जो कुछ अजब ग़ज़ब सी अनुभूति में ढल गए हैं
गहरे स्याह आसमान की ओर
जब भी देखता हूँ, कोई आकृति सी उभरती लगती है
तब साँस लेने की गुंजाइश भी जैसे सिमट जाती है

 

Transcriber:  Deepti Gupta

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