वो दिन जब मैं खुश थी… (The day that I was happy) – Hannie Rouweler / Translation English into Hindi :Deepti Gupta

Poem by Hannie Rouweler
 
 
वो दिन जब मैं खुश थी…
 
खिली धूप वाला ख़ुशगवार दिन था
सूरज की सुनहरी धूप मेरे और तुम्हारे
आधे चेहरों पर पड़ रही थी
उस दिन मैं खुशी से उमग रही थी
इतनी अधिक कि मेरे शब्द
श्वेत तितलियों . की तरह
मेरे इर्द – गिर्द, तो कभी मेरे
कंधों, तो कभी पार्क की ओर बढ़ते
मेरे कदमों पर मंडरा .रहे थे
शीशे के बोर्ड के पास
मैंने भावनाओं और सम्वेदनाओं की
कलाकृति सी अपनी एक कविता पढ़ी
“पर, तुम वो नहीं थे, जैसा कि
तुमसे भावनात्मक जुड़ाव के बाद
मैं तुम्हें सोच रही थी”
तुम से उम्मीद लगाए हुए थी कि
हम दोनों मिल कर अपने जीवन में
पसरे दुख-दर्द का बोझ हल्का करेगें
बाँटने पर वह बोझ धरती से भी हलका
हो जाएगा और हम राहत महसूस करेगें
सोचा था कि हम दोनों प्रगाढ़ प्रेम के
सूत्र से इस तरह बँधेगें और उस डोर
को हम इस तरह कस के थामे रखेगें कि
वह अदृश्य रूप से हम दोनों के बीच
सेतु बन, प्यार के रिश्ते में लपेटे रखेगा
लेकिन,दुखद कि मैंने तुम्हें काफ़ी देर से
पहचाना और अपने को खाली हाथ पाया
क्योंकि दरवाज़ा बन्द होने पर, नज़रों से
दूर होते ही,तुम सब भूल जाने वालो में थे
जिसकी मैं कभी कल्पना
नहीं कर सकती थी
तुम्हारे लिए मैं एक हल्की-फुल्की चीज़ थी
अब मैं उस कीमती पल
अनमोल झलक को
सँजोए हूँ, जिससे मुझे
कोई जुदा नहीं कर सकता
मेरा वो अंश, जो उस दिन मेरे साथ था
ऑस्टेंड में, समुद्र तट पर नहाते लोग और
वो मुख्य मार्ग जहाँ से मैंने स्कर्ट ख़रीदी थी
और बाद में एक दोस्त को भेंट कर दी थी
सागर का वह दृश्य,ताज़ी हवा के झोंके का
मेरे केशों को स्पर्श करना,वह तस्वीर आज
भी पूरी है, जब मैं किसी ऐसे को तुम में
देखती हूँ, जो मेरी परवाह करता है
मेरे साथ ख़्याल – प्यार, सुख-दुख .बाँटता है ।
 
 
 
Transcriber – Deepti Gupta
 
 
 
The day that I was happy
 
It was the sun that shone half on my face
and the other half
on you. That day that I was happy,
carried the words with me like white butterflies
around my shoulders
at every step to the park. Where I would read a poem
near the glass board, a piece of art.
You were not what I actually had meant
with connectedness, make each other’s burden lighter
than the earth, holding something tight like a thread
that moves invisibly along with us. You were not
the way I saw you much later, empty-handed,
who soon forgot about me as soon as a door was closed.
I was the lightest specific weight for you
that a woman can imagine.
Now I hang on to a glance, a moment, that nobody
can take away from me. That part of me what still
remained of that day in Ostend. Bathing people
on the beach, the boulevard where I bought a skirt
and later gave to a friend, the view of the sea with fresh
wind in my hair. The picture is still complete when I see
someone else in you who cares and shares with me.
 
Translation Dutch into English: Hannie Rouweler
 

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