Poems by Juljana Mehmeti / Translated into Hindi by Deepti Gupta

 
Poems by Juljana Mehmeti
 
 
जादुई पल ( Magic moment)
 
सबेरा धीरे-धीरे भोर के पथ पर उतर रहा है
जहाँ चाँद की उजली चाँदनी और छाँव
अतीत की यादों के पिटारे को खोलने लगी है
एक जादू भरा पल
साँस थम सी गई है
सपनों के बीच नंगे पाँव
ज़मीर की दहलीज को पार करते हुए
और वे सपने हमारा पीछा करते चल रहे हैं
दूसरे अनुभव के आधार पर
कहा जा सकता है कि
जो पहले घट चुका है,वह दोबारा भी घट सकता है
कुबूले हुए भेदों के बोध के रहस्य में
अवरुद्ध रौशनी
शाम का ऊष्मा भरा आलिंगन
और दिन की अगवानी करने वाली
गुनगुनी भोर का रोमांच
‘अज्ञात’ को लेकर उभरी जिज्ञासा
जो फूलों की सोई अलसाईं
पंखुरियों में बद्गती जाती है
जो ओस की चमक को ख़्वाब में देख रही होती हैं
और ‘आगत’ को सोच कर काँप-काँप जाती हैं !
 
 
 
आत्मिक पुनर्जीवन ( Spirit revival )
 
जगह-जगह घूमना
खोज के लिए राय-मशविरे, चर्चाएं
जहाँ एक-एक रहस्य आत्मा के पुनर्जीवन
के लिए उजाले की खोज में
ऐसे कुलबुलाता सा है
जैसे चिड़िया पंख न होने
पर उड़ने को कुलबुलाए
 
प्रतिबिम्बित अस्तित्व की मरीचिका
ऎसी सृष्टि की खोज करती हुई
जिसकी रूप-रेखा बन रही है
जहाँ हर चीज़ एक अदृश्य सूत्र में
जुडती और टूटती है
शायद मैं लापता ध्वनि हूँ
झुँझलाए बादलों की नष्ट मरीचिका में
चेतना में चेतनाहीनता
प्रतिच्छाया में बारिश की दो बूँदों का मिलना
बहते आकाशों के झरने में अज्ञात अनावृत हो जाता है
जब रात, भोर के साथ
हौले-हौले मनोहरता से सफ़ेद होती जाती है
आह, खानाबदोश भोर और लुप्त होता तारामंडल….!
 
 
 

Translated into Hindi by Deepti Gupta

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