कौन हो तुम ? / रंजना शरण सिन्हा  

  रंजना शरण सिन्हा     कौन हो तुम ?   प्रतिबिंबित हो तुम शब्दों में अनजान-अनाम -सी एक छवि इस शाम की नीली चादर में तन्हा-तन्हा दिल एक कवि   ख़्वाबों की क़ुर्बत सच की दूरी भला जानता कौन … Continue reading