Poems by Varsha Saran

Poems by Varsha Saran
 
 
Excess
 
Excess of everything is bad
Excess of love
Suddenly turns
Into excess of hurt
 
Excess of hatred
Sometimes changes,
Changes into excess crime
 
Excess of greed
Can create distance,
An unmeasurable distance between
You and yourself,
 
Excess of lust
Is a nonstop thrist
That never ever be quenched
And finally leads to
A self murder of your soul
 
Excess of materialistic love
Is quiet enough
To make you lonely
 
A lonely creature
That is surrounded with
nonlivings
Where you are ‘nowhere’!!
 
 
 
प्यार का प्रकाश (Light of love)
(Hindi)
 
प्यार के प्रकाश से संश्लेषित
ये जीवन की ‘हरीतिमा” देती है जीवन
नव आयाम से मानवता को करती है रोशन
करती है मानव समाज का पोषण और
जीव जगत का,
प्रेम में ही शांति है
उन्नति है,उजाले की सकारात्मकता है
प्रेम से इतर ,
नफरत की आग से जलता
समाज , अवनति का उदाहरण है
हिंसा और आतंकवाद से मरती
मानवता है
अशांति के बादल से हाहाकार, अवनति, बदहाली , भुखमरी और अशिक्षा की होती अम्लीय वर्षा है
ग़र करना है सम्पूर्ण पृथ्वी का विकास
और बचाना है इसे नाश से
तो स्वीकार करना ही होगा कि
प्यार से तुम हो, हम हैं,
और ये सारा संसार है
प्यार एक दैवीय उपहार है
भिन्न भिन्न रूप ,और प्रकार है
ये केवल नर नारी के दैहिक प्रेम का परिचायक नहीं
वरन सुदामा कान्हा,राधा कृष्ण,मीरा की भक्ति
और कबीर के दोहों में समाहित
एक विस्तृत ग्रंथ है,आलिंगन हो जब प्रेम का
जो मिटते सारे भ्रमजाल
और पनपता सिर्फ और सिर्फ जीवन है!!
 
वर्षा सरन@ कॉपीराइट
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