Poems by Rajashree Mohapatra / Translated into Hindi by Rao Shivraj Pal Singh

Poems by Rajashree Mohapatra
 
 
AN ACCOMPLISHED WISH …
 
The crowd is silent…
like stillness by ebb of ocean
He sings no more
yet looks on without a word.
 
She dances…
Her limbs speak unspoken love
They are deep down at the bottom of vale yet unplumbed.
 
The night melts …
like frozen shadow
In silence they gaze
Two star-bound spirits spiralling up
into ancient sky
An accomplished wish ,
Yet with no fear to die …
 
©®Rajashree Mohapatra.
Bhubaneswar, India
 
 
 
पिघलती रात : विलीन होते दो
 
सन्नाटे की चादर ओढ़े थी भीड़
शांति ऐसी जैसे सागर खो गया
ज्वार भाटे के उतार मे
निशब्द है बोल गाने के फिर
भी भाव समझ रहे सब कोई…
 
वह नाच रही है …
तन से भी औे मन से भी,
अंग अंग से छलकता प्यार
जैसे लहरें छोड़ रही मोती
किनारे बिन‌ मांगे हर बार
गहरा सागर से भी मगर
अनपेक्षित, बिन बोले भी
नज़रों से टपकता नेह…
 
धीमे धीमे रात पिघल रही
छाया हो रहीं विलीन चांद के
मद्धम‌ पडते उजाले में
दो तारे भी खो रहे अपना
अस्तित्व विलीन होते एक दूसरे
की बाहों में बिना किसी भय के
सिमटते सिकुड़ते अनंत नभ में
‘राजश्री’ की ख्वाहिश पूरी
हो रही सदा के लिए।
 
 
…DREAMS AEONS OLD
 
Those silvery beams of rain,
hovering over blooming hills
Percolate into my veins
as gleam of rays
and
I wished for rain .
 
You flooded into my night
with handful of light
 
I proximated to the heaven
 
We painted the moments
with sparkling colours beyond seven.
 
Oh my love !
 
You furloughs those moments ,
those waves of emotions
like ecstasy of brimming tide yet silently
shaping those pebbles
with living memoirs. .. aeons old .
with dreams across window sill
to gravitate into hued of blue within
our little souls .
 
©®Rajashree Mohapatra.
Bhubaneswar, India 
 
 
 
सपने
…..पुराने सपने !!
 
चांदी सी चमकती रेखाओं वाला
बरखा से धुली चमकती चोटियों पर
मंडराया हो जलधर (बादल) जैसे
उतर गया हो जैसे
प्रकाश पुंज मेरी रग रग में ।
 
मेरी चाहत कि बरखा आए
और उस बारिश के संग तुम आओ….
 
तुम अाई जैसे आ गई
उसी रात …..बाढ़….
ढेर सारे स्नेहिल प्रकाश संग ।
 
हिलोरें लेने लगा स्वर्गिक आनंद
मेरे तन मन में… ।
 
संग साथ तेरे.. रंग गए वो पल
इंद्रधनुषी रंगो के भी परे कई कई रंगों में ।
 
ओ मेरे प्रिय…. !!
 
जिए थे हमने उन पलों को
गढे थे तुमने जो मधुर क्षण
भावनाओं का उफन आया
जैसे ज्वार
धीमे से रंगीन रत्न भरे
उन यादों के…
सपने…
….. पुराने सपने !!
 
झरोखे के उस पार
नीलाभ आसमां में टंगे इन्द्रधनुष
जैसे घनीभूत होती हमारी आत्माएं
और साथ साथ बुने रंग रंगीले …
सपने ….
……पुराने सपने !!
 
 
 
Singing …
 
the glory silently,
my life is a celebration
 
Ballads of love I send
in your admiration .
 
It is a journey of bliss
guides the divine light
 
Wake me up my love !
through darkness of night.
 
©Rajashree Mohapatra
 
 
 
शांत मेरा मन गा रहा है …
 
शांत मेरा मन गा रहा है तेरी महिमा
गुणगान कर रहा तेरे दिव्य कृपा कटाक्ष का,
 
करता तू सतत मार्गदर्शन उस घने अंधकार में ,
जागी है जब से मन में तेरे प्यार की अनुभूति ,
 
बसी दिव्य ज्योति जब से तुम्हारी मेरे हृदय में,
बन गया है स्वयं ही एक उत्सव मेरा दिल,
 
आलोकित रखो प्यार से अपने मेरा मानस पटल, जो रख रहा अंधेरों में भी ‘राज’ को तेरी राह पर”
 
राजश्री मोहापात्र ©®
 
 
 
Translated into Hindi by Rao Shivraj Pal Singh

4 thoughts on “Poems by Rajashree Mohapatra / Translated into Hindi by Rao Shivraj Pal Singh

  1. Awesome, excellent poems and very intellectually translated.
    वाहह्हहह वाहह्हहह… बेहतरीन कविताएं… और बड़ी ही बुद्धीमता पूर्वक अनुदित।
    बधाई एवं शुभकामनाएं। कवियत्री महोदया को और अनुवादक महोदय को भी सादर।
    अजय कुमार पारीक ‘अकिंचन’
    जयपुर (राजस्थान)

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