Poems by Rajashree Mohapatra / Translated into Hindi by Rao Shivraj Pal Singh

Poems by Rajashree Mohapatra

 

Singing …

the glory silently,
my life is a celebration

Ballads of love I send
in your admiration .

It is a journey of bliss
guides the divine light

Wake me up my love !
through darkness of night.

©Rajashree Mohapatra

 

शांत मेरा मन गा रहा है …

शांत मेरा मन गा रहा है तेरी महिमा
गुणगान कर रहा तेरे दिव्य कृपा कटाक्ष का,

करता तू सतत मार्गदर्शन उस घने अंधकार में ,
जागी है जब से मन में तेरे प्यार की अनुभूति ,

बसी दिव्य ज्योति जब से तुम्हारी मेरे हृदय में,
बन गया है स्वयं ही एक उत्सव मेरा दिल,

आलोकित रखो प्यार से अपने मेरा मानस पटल, जो रख रहा अंधेरों में भी ‘राज’ को तेरी राह पर”

राजश्री मोहापात्र ©®
Rao Shivraj Pal Singh.

 

…DREAMS AEONS OLD

Those silvery beams of rain,
hovering over blooming hills
Percolate into my veins
as gleam of rays
and
I wished for rain .

You flooded into my night
with handful of light

I proximated to the heaven

We painted the moments
with sparkling colours beyond seven.

Oh my love !

You furloughs those moments ,
those waves of emotions
like ecstasy of brimming tide yet silently
shaping those pebbles
with living memoirs. .. aeons old .
with dreams across window sill
to gravitate into hued of blue within
our little souls .

©®Rajashree Mohapatra.

 

सपने
…..पुराने सपने !!

चांदी सी चमकती रेखाओं वाला
बरखा से धुली चमकती चोटियों पर
मंडराया हो जलधर (बादल) जैसे
उतर गया हो जैसे
प्रकाश पुंज मेरी रग रग में ।

मेरी चाहत कि बरखा आए
और उस बारिश के संग तुम आओ….

तुम अाई जैसे आ गई
उसी रात …..बाढ़….
ढेर सारे स्नेहिल प्रकाश संग ।

हिलोरें लेने लगा स्वर्गिक आनंद
मेरे तन मन में… ।

संग साथ तेरे.. रंग गए वो पल
इंद्रधनुषी रंगो के भी परे कई कई रंगों में ।

ओ मेरे प्रिय…. !!

जिए थे हमने उन पलों को
गढे थे तुमने जो मधुर क्षण
भावनाओं का उफन आया
जैसे ज्वार
धीमे से रंगीन रत्न भरे
उन यादों के…
सपने…
….. पुराने सपने !!

झरोखे के उस पार
नीलाभ आसमां में टंगे इन्द्रधनुष
जैसे घनीभूत होती हमारी आत्माएं
और साथ साथ बुने रंग रंगीले …
सपने ….
……पुराने सपने !!

कविता राजश्री मोहापात्र ©®

 

BALLAD OF LOVE!

O Ballad of love!
stay near me a little longer.
Before we depart ,
Let’s float together
to cuddle breath of emptiness.

How discerned and delicate is our fear !
How sweet is our mists of tear !

Our hearts are singing birds
Our voice might give alarm

Does real love exist on earth ?
Is love our guide from our birth ?

Our hearts echo voices of love
So clear as triumphant crystal, so profound as blue flame
no tumultuous songs
Perhaps never sung before…

Our journey is so short yet so long,
fear no wrong!
Resolve all anvils before we go nowhere!
Forgive me dear…

©®Rajashree Mohapatra

 

ओ मेरी सांसों के सरगम….

कुछ देर तो और ठहर मेरे साथ
इसके पहले कि हम जुदा हो जाएं
कुछ देर और साथ साथ चलें
इससे पहले कि मेरी सांसों के
सरगम ही ना रीत जाएं।

अस्तित्वहीन भय में ही तो जी रहे हैं हम
आंसुओं का सैलाब भी क्यूं लग रहा मधुर

दिल चहचहा रहा चिड़ियों की माफिक
हमारी अपनी आवाज लग रही
जैसे रॉबिन गा रहा खिड़की के पार

धरती पर यह असली प्यार सदा से ही रहा मौजूद
यह प्यार ही तो जन्म से ही दिखा रहा हमें राह

प्यार की प्रतिध्वनि निकल रही दिल से
इतनी ओजस्वी जैसे हो लपट अग्नि की
कितनी स्पष्ट जैसे मेघालय की नदीतल में दिख रहा हो कोई हीरा
विजय गीत ऐसे गाए जो शायद
ही गाये हों किसी ने पहले कभी

सफर हमारा छोटा भी है
मगर लगता कभी लंबा भी
गलत कुछ भी नहीं उसमें
यदि सुलझा लें सभी मसले कहीं
भी ना जाने से पहले भी अगर
माफ़ कर देना मुझे मेरे ए दोस्त…”

 

Translated into Hindi by Rao Shivraj Pal Singh

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